अम्बेडकरनगर। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में बीएनकेबी पीजी कॉलेज, अकबरपुर में आयोजित ग्रीष्मकालीन कार्यशाला ‘बोधि-पथ’ के चौथे दिन बौद्ध दर्शन और योग के संबंध पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. राजेश उपाध्याय सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
‘बौद्ध दर्शन में योग’ पर विशेषज्ञ का व्याख्यान
मुख्य अतिथि डॉ. राजेश उपाध्याय ने ‘बौद्ध दर्शन में योग विमर्श’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध ने योगिक साधनाओं के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ते हुए अष्टांगिक मार्ग में सम्यक् समाधि को विशेष महत्व दिया। उन्होंने बताया कि महायान बौद्ध परंपरा के योगाचार दर्शन में चित्त की शुद्धि और आत्मबोध को योग साधना का मूल आधार माना गया है।
उन्होंने योगाचारभूमि शास्त्र और पाली त्रिपिटक के संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि योग के माध्यम से चित्त को निर्मल बनाकर निर्वाण की प्राप्ति संभव मानी गई है। उनके अनुसार बौद्ध दर्शन में योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, मानसिक संतुलन और अंतर्दृष्टि प्राप्त करने की प्रक्रिया है।
मानसिक स्वास्थ्य में बौद्ध ध्यान पद्धतियों की भूमिका पर जोर
व्याख्यान के दौरान डॉ. उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के बीच विपश्यना और पूर्ण सजगता (माइंडफुलनेस) आधारित बौद्ध ध्यान पद्धतियां मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांत आज भी जीवन में संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने का मार्ग दिखाते हैं।
छात्र-छात्राओं की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला के अंत में सह-संयोजक डॉ. रवि कुमार ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार, डॉ. आशीष कुमार चतुर्वेदी, विनय कुमार, सुमित्रा पटेल सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।









