- डीएम की अध्यक्षता में बनेगी सतर्कता समिति
- प्राइवेट प्रैक्टिस करते मिले डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई
- नियमित सरकारी डॉक्टरों पर लागू होंगे नए निर्देश
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने बढ़ाई निगरानी
- एनपीए लेने वाले डॉक्टरों को नियमों का करना होगा पालन
अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में तैनात नियमित सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर एक बार फिर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है। शासन ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) को निर्देश जारी कर सतर्कता समिति की बैठक कराने और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह व्यवस्था संविदा चिकित्सकों पर लागू नहीं होगी।
अब डीएम की टीम करेगी निगरानी, नियम तोड़ने वालों पर होगी रिपोर्ट
शासन के निर्देश के अनुसार जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सतर्कता समिति गठित की जाएगी। समिति में पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और जिलाधिकारी द्वारा नामित अभिसूचना इकाई के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। मुख्य चिकित्साधिकारी समिति के सचिव होंगे।
समिति निरीक्षण के दौरान यदि किसी सरकारी डॉक्टर को प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए पाती है, तो उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल तक, शिकायतों पर फिर बढ़ी सख्ती
जिले में लंबे समय से सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज और जिला चिकित्सालय से जुड़े कई डॉक्टर दूसरे लोगों के नाम से पंजीकृत निजी अस्पतालों का संचालन कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों का रुख भी ऐसे अस्पतालों की ओर होने की बात कही जाती रही है।
शहर के अलग-अलग इलाकों और प्रमुख मार्गों पर निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन्हीं शिकायतों के बीच शासन ने निगरानी व्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने का निर्णय लिया है।









