अम्बेडकरनगर। बुनकर नगरी टांडा में रविवार रात अदबी और साहित्यिक संस्था शमा ग्रुप टांडा के तत्वावधान में काज़ीपुरा में महफ़िल-ए-शमा मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले और आसपास के क्षेत्रों से आए शायरों ने अपनी रचनाओं से महफ़िल को यादगार बनाया। देर रात तक चले मुशायरे में उर्दू अदब, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषय प्रमुख रहे।
नात-ए-पाक से हुआ कार्यक्रम का आगाज
कार्यक्रम का संयोजन मो. मजाहिर ने किया, जबकि अध्यक्षता कुमैल अहमद सिद्दीकी ने की। संचालन मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत सईद टांडवी ने नात-ए-पाक प्रस्तुत कर की।
साहित्य और उर्दू अदब की परंपरा पर जोर
अध्यक्ष कुमैल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि शायरी इंसानी भावनाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति है। उन्होंने नई पीढ़ी को साहित्य और उर्दू अदब से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया।
संचालक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू अदब और शायरी देश की साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। साहित्यिक आयोजन समाज में तहजीब, संवाद और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।
संयोजक मो. मजाहिर ने कार्यक्रम में शामिल सभी शायरों और श्रोताओं का आभार जताते हुए कहा कि उनकी सहभागिता से मुशायरा सफल रहा।
शायरों ने पेश किए चुनिंदा कलाम
मुशायरे में मतलूब टांडवी, इंसाफ टांडवी, सईद टांडवी, कमर जीलानी टांडवी और कुमैल डोंडवी ने अपने अशआर पेश कर खूब सराहना बटोरी। शायरों ने प्रेम, सामाजिक सरोकार, मानवीय रिश्तों और बदलते दौर के विभिन्न पहलुओं को अपनी शायरी में प्रस्तुत किया।
इसके अलावा सोनू टांडवी, सेराज अनवर टांडवी, कदीर टांडवी, रिजवान टांडवी, आलम टांडवी, अर्शी टांडवी, डॉ. शादाब, डॉ. जफर शब्बू, एजाज टांडवी, हाजी इनामुल्ला, कमाल चिश्ती टांडवी और शाहिद टांडवी सहित कई शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए।









