
अम्बेडकरनगर। गन्ने की फसल में इन दिनों ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए गन्ना विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी कर बचाव के उपाय बताए हैं। विभाग ने किसानों से नियमित निगरानी करने और समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।
जिला गन्ना अधिकारी साहब लाल यादव ने बताया कि इन कीटों की मादा एक समूह में अंडे देती है। करीब चार से पांच दिन बाद इन अंडों से छोटी सुंडियां निकलती हैं। ये शाम के समय समूह बनाकर पत्तियों को नुकसान पहुंचाती हैं। दिन के समय सुंडियां जमीन के अंदर, सूखी पत्तियों और गन्ने की गोंफ में छिपी रहती हैं।
उन्होंने बताया कि पेड़ी फसल में इन कीटों का प्रकोप अधिक देखा जाता है। मादा कीट गहरे भूरे रंग की होती है, जबकि नर कीट हल्के रंग के होते हैं। प्रौढ़ और शिशु दोनों ही पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे गन्ने की बढ़वार प्रभावित होती है।
किसानों को दिए गए बचाव के सुझाव
गन्ना विभाग ने किसानों को खेत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। खेत में समय-समय पर सिंचाई करते रहने को कहा गया है, ताकि फसल स्वस्थ बनी रहे।
खेत को खरपतवार और सूखी पत्तियों से साफ रखने की भी सलाह दी गई है। विभाग ने संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग पर जोर दिया है।
इन कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह
विभाग के अनुसार सुबह या शाम के समय प्रति हेक्टेयर 625 लीटर पानी में किसी एक कीटनाशक का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।









