14 महीने पहले ग्लेशियर झील फटने के बाद चीन ने मजबूत किया था सिस्टम
26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा से लगे हिमालयी इलाके में आई भीषण आपदा ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि चीन ने करीब 14 महीने पहले हुई एक बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद इस इलाके में बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं।
पिछली आपदा के बाद छह महीने बंद रहा बॉर्डर पोर्ट
करीब 14 महीने पहले इसी इलाके में ग्लेशियर की झील फटने से भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति बनी थी। इसमें ट्रक, घर और एक पुल बह गए थे। घटना के बाद चीन ने करीब छह महीने तक बॉर्डर पोर्ट बंद रखा और आपदा से बचाव के लिए व्यवस्थाओं को मजबूत किया।
24 घंटे पानी के स्तर पर रखी जा रही थी नजर
चीन ने इलाके में पानी के स्तर की 24 घंटे निगरानी शुरू की थी। इसके अलावा तटबंध और बाढ़रोधी दीवारें बनाई गईं। बाढ़ के पानी का दबाव कम करने और उसका रास्ता बदलने के लिए नहरें भी तैयार की गईं।
अधिकारियों और ग्रामीणों को दी गई ट्रेनिंग
आपदा से निपटने के लिए स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया। संभावित हालात से निपटने के लिए मॉक ड्रिल भी कराई गई। जुलाई में तैयारियों की समीक्षा कर व्यवस्थाओं को परखा गया था।









