अंबेडकरनगर। तहसील जलालपुर के सम्मनपुर क्षेत्र स्थित मदरसा अरबिया नूरुल उलूम में गुरुवार शाम इशा नमाज के बाद जलसा-ए-दस्तारबंदी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुरआन मुकम्मल करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।
तिलावत से शुरू हुआ कार्यक्रम
जलसे की शुरुआत कारी मसूद अहमद ने कुरआन की तिलावत से की। इसके बाद पूरे कार्यक्रम में धार्मिक माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
नौ छात्रों की दस्तारबंदी
कार्यक्रम में नौ छात्रों की दस्तारबंदी की गई। इनमें हाफिज मो. आरिफ, हाफिज मो. अरबाज, हाफिज मो. तौसीफ, हाफिज मो. शोएब, हाफिज मो. जीशान, हाफिज अबूउबैदा, हाफिज मो. आदिल और हाफिज उबैदुररहमान शामिल रहे। सभी को मौलाना सैयद मो. अजहर मदनी ने दस्तार बांधकर सम्मानित किया।
शिक्षा और नैतिकता पर जोर
मुख्य अतिथि मौलाना सैयद मो. अजहर मदनी ने कहा कि मदरसे धार्मिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और अनुशासन की शिक्षा देते हैं। उन्होंने कहा कि कुरआन की तालीम समाज में शांति और जागरूकता का संदेश देती है।
कार्यक्रम की सदारत मौलाना अब्दुल रशीद ने की। उन्होंने कहा कि कुरआन की तिलावत से जीवन में सुकून और सही दिशा मिलती है।
उलेमा-ए-किराम ने दिए विचार
कार्यक्रम में कारी मोहम्मद अफजाल, कारी आफाक आलम, मौलाना तौफीक अहमद और मुफ्ती मोहम्मद शमीम सहित कई उलेमा-ए-किराम ने विचार रखे। उन्होंने कुरआन और हदीस की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। पूरे जलसे के दौरान मदरसा परिसर धार्मिक माहौल में रहा। कार्यक्रम के अंत में दुआ के साथ आयोजन का समापन किया गया।









