नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग देशभर में मतदाता पहचान सत्यापन अभियान के अंतिम चरण में पहुंच गया है। आयोग अब शेष 39 करोड़ 73 लाख मतदाताओं के घर-घर जाकर पहचान सत्यापन की तैयारी कर रहा है। इस बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन- SIR) अभियान के तहत मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) में बड़े बदलाव सामने आए हैं।
SIR अभियान के बाद अब तक 59 करोड़ मतदाताओं के नए पहचान पत्र तैयार किए जा चुके हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव मतदाताओं की तस्वीरों का है। नए कार्ड में हालिया और रंगीन फोटो शामिल की गई हैं, जिससे पहचान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और सटीक हो सकेगी।
निर्वाचन आयोग के 9 लाख 20 हजार से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। इस दौरान मोबाइल फोन के जरिए मतदाताओं की तस्वीरें लेकर उन्हें पहचान संबंधी दस्तावेजों से जोड़ा गया और मतदाता सूची को अद्यतन किया गया। आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया के लिए मतदाताओं से कोई शुल्क नहीं लिया गया।
पड़ताल में सामने आया है कि पुराने मतदाता पहचान पत्रों में बड़ी संख्या में तस्वीरों से जुड़ी खामियां थीं। करीब 30 प्रतिशत कार्ड ऐसे थे, जिनमें फोटो नहीं लगी थी या तस्वीर इतनी धुंधली थी कि व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल था। कई कार्डों में लगी तस्वीरें 20 से 30 वर्ष पुरानी थीं, जिससे पहचान संबंधी दिक्कतें सामने आती थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, संविधान में फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के कारण पहले मतदाताओं को फोटो देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता था। इसी वजह से बड़ी संख्या में कार्ड बिना फोटो या कम गुणवत्ता वाली तस्वीरों के जारी हुए थे।









