लखनऊ। King George’s Medical University के यूरोलॉजी विभाग में सामने आए करीब 2.5 करोड़ रुपये के कथित दवा घोटाले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों को विभाग की एक अलमारी से लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुई हैं, जिनमें अधिकांश कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जहां वास्तविक मरीजों को दवाएं और जांच रिपोर्ट मिलने में 15 से 30 दिन तक का समय लग जाता था, वहीं फर्जी लाभार्थियों के नाम पर महंगी दवाएं मात्र 3 से 5 दिन में मंगाई जा रही थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को कागजों पर कैंसर और अन्य गंभीर रोगों का मरीज दिखाकर दवाओं की खरीद की गई।
जांच अधिकारियों के अनुसार असाध्य योजना में पंजीकृत मरीजों के आयुष्मान कार्ड और UHID नंबर का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि कई मामलों में फर्जी मरीजों के नाम पर दवाएं मंगाई गईं, जबकि कुछ मामलों में मरीज की मृत्यु के बाद भी उसके नाम पर दवाओं की खरीद दर्शाई गई।
बरामद दवाओं में लगभग 90 प्रतिशत कैंसर से संबंधित और 10 प्रतिशत आयरन एवं प्रोटीन की दवाएं हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मरीजों के नाम पर मंगाई गई इन दवाओं की कालाबाजारी की गई या फिर उन्हें खुले बाजार अथवा संबंधित कंपनियों को वापस बेच दिया गया।









