इस्लामाबाद। पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के दो प्रांतीय मंत्रियों से जुड़ी घटनाओं ने राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। PTI के मंत्री फजल शकूर खान को कथित तौर पर हथियारबंद नकाबपोशों द्वारा ले जाने की खबर सामने आई है। वहीं मलाकंद में प्रांतीय मंत्री शकील अहमद से जुड़ी फायरिंग की घटना को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
ये घटनाएं ऐसे समय हुई हैं, जब PTI ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर 27 सितंबर को इस्लामाबाद में मार्च करने का ऐलान किया है। पार्टी नेतृत्व ने कहा है कि गिरफ्तारियों और हालिया घटनाओं के बावजूद मार्च जारी रहेगा। PTI के नेताओं ने आरोप लगाया है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई कर प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की जा रही है।
टोल प्लाजा के पास रोकी गई मंत्री की गाड़ी
रिपोर्टों के मुताबिक, फजल शकूर खान को पेशावर के मोटरवे टोल प्लाजा के पास कथित तौर पर रोका गया। PTI और उसके नेताओं की ओर से सामने आए दावों के अनुसार, सादे कपड़ों में मौजूद हथियारबंद लोगों ने उनकी गाड़ी को घेरा। सोशल मीडिया पर सामने आए कथित वीडियो में एक वाहन को रोके जाने और कुछ लोगों को उसके आसपास मौजूद देखा जा सकता है। हालांकि, घटना की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
खैबर-पख्तूनख्वा विधानसभा में भी इस मामले पर चर्चा हुई। विधानसभा में दावा किया गया कि फजल शकूर खान को मोटरवे से उठाया गया। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि मोटरवे पर चेकिंग के दौरान मंत्री की गाड़ी और सुरक्षा कर्मियों से कानून प्रवर्तन अधिकारियों का टकराव हुआ था।
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शकील अहमद से जुड़ी फायरिंग पर दो अलग दावे
मलाकंद के बटखेला बाईपास पर मंत्री शकील अहमद से जुड़ी फायरिंग की घटना भी विवाद में है। CTD की ओर से दर्ज FIR में आरोप लगाया गया कि शकील अहमद और अन्य लोगों ने CTD कर्मियों पर गोलीबारी की, जिसमें एक अधिकारी घायल हुआ। दूसरी ओर शकील अहमद ने अज्ञात हथियारबंद लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग शिकायत देने की बात कही है।
PTI नेताओं ने घटना को मंत्री के खिलाफ कथित हमले या अपहरण की कोशिश बताया है, जबकि FIR में घटना का अलग विवरण दर्ज है। इसलिए मामले में आरोप और आधिकारिक रिकॉर्ड फिलहाल अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।









