रेजीनगर में ममता गुट के उम्मीदवार ने नामांकन लिया वापस

पुराने चुनाव चिह्न के बिना चुनाव लड़ने में दिक्कत बताई, नंदीग्राम के बाद दूसरा नामांकन वापस

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। चौधरी ने इसके पीछे मुख्य वजह पार्टी के पुराने चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ का नहीं मिलना बताया। उनके अनुसार नए चुनाव चिह्न को कम समय में मतदाताओं तक पहुंचाना मुश्किल था।

कार्यकर्ताओं पर दबाव का भी लगाया आरोप

रबीउल आलम ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं को प्रचार करने की अनुमति नहीं मिल रही थी और उन पर दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में नए चुनाव चिह्न के साथ चुनाव प्रचार करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। हालांकि, कार्यकर्ताओं पर दबाव संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।

एक दिन पहले नंदीग्राम में भी उम्मीदवार ने नामांकन वापस लिया

रेजीनगर से पहले शुक्रवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। हालांकि, इसके कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट लंबित था।

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद ममता बनर्जी और कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई की है।

दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। दोनों सीटें विधायकों के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई हैं। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

इन घटनाक्रमों के बीच निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न दिया गया है। दोनों गुटों को पुराने ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया गया है।

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