लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर थम चुका है, लेकिन बाढ़ का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। बांधों और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार आ रहे पानी के कारण कई नदियां उफान पर हैं। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदेश के 11 जिलों में 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के इलाकों में पानी भर गया है और कई स्थानों पर नावों से लोगों की आवाजाही हो रही है।
लखीमपुर खीरी में शारदा का कटान तेज
लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के बढ़े जलस्तर के कारण कटान का खतरा बना हुआ है। नदी के किनारे बसे इलाकों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के पानी के कारण वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों की ओर आने का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में गांवों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
लखनऊ में गोमती का जलस्तर बढ़ा
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। फैजुल्लागंज और बीकेटी समेत नदी के आसपास के कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई परिवारों ने अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है, जबकि कुछ लोग ऊंचे स्थानों और सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं। कुछ जलमग्न सड़कों पर नावों से आवाजाही हो रही है।
अधिकारियों के मुताबिक गोमती में बढ़ाव का एक बड़ा कारण शहर में ताजा बारिश के बजाय सीतापुर, लखीमपुर खीरी और अन्य ऊपरी जिलों से आ रहा पानी है। गोमती बैराज पर 24 घंटे में जलस्तर करीब छह इंच बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
रिवर फ्रंट और आसपास के इलाकों में असर
गोमती का पानी बढ़ने से नदी के आसपास के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण कुछ सार्वजनिक स्थलों को एहतियातन बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बारिश नहीं, फिर भी क्यों बढ़ रहा पानी?
यूपी में बाढ़ की मौजूदा स्थिति का सबसे बड़ा कारण यह है कि बारिश थमने के बावजूद नदियों के ऊपरी कैचमेंट और बांधों से पानी नीचे की ओर पहुंच रहा है। इससे नदी का जलस्तर कुछ इलाकों में बारिश बंद होने के बाद भी बढ़ सकता है।
यही वजह है कि मौसम साफ होने के बावजूद नदी किनारे बसे जिलों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
3 अक्टूबर को यूपी से मानसून की विदाई
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश से पूरी तरह वापस लौट गया। यह सामान्य समय से करीब दो दिन पहले की विदाई है। मानसून 30 जून को यूपी पहुंचा था, जो सामान्य आगमन से 12 दिन देर था। यानी इस साल मानसून ने प्रदेश में करीब 95 दिनों तक सक्रिय रहने के बाद विदाई ली।
मानसून की विदाई के बाद आने वाले दिनों में मुख्य रूप से मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। हालांकि, नदियों में पहले से मौजूद अतिरिक्त पानी और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले प्रवाह के कारण बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है।
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