अम्बेडकरनगर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश एसटीएफ के साथ लखनऊ में हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी अपराधी संजीव उर्फ संजय के मारे जाने की पुष्टि के बाद अम्बेडकरनगर के अहिरौली थाना क्षेत्र स्थित चककोडार गांव में सन्नाटा छा गया। घटना की जानकारी के बाद पूरे दिन गांव में लोग घटनाक्रम पर चर्चा करते रहे।
सूत्रों के अनुसार, 40 वर्षीय संजीव हाल ही में हुए लखनऊ के बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड में वांछित था। इस मामले में पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। बताया जाता है कि वह लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था।
डेढ़ दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा
पुलिस रिकॉर्ड और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार संजीव पिछले करीब 15 वर्षों से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था। उस पर हत्या, लूट और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। बताया जाता है कि वह दिलीप वर्मा गैंग से जुड़ा रहा और कई संगीन मामलों में उसकी भूमिका सामने आई थी।
एक मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई थी, जिसके बाद वह लंबे समय तक जेल में रहा। बाद में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद वह बाहर आया था।
गांव और ससुराल के बीच चलता था ठिकाना
स्थानीय लोगों के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद संजीव का अधिकांश समय गांव और अयोध्या के गोसाईगंज क्षेत्र स्थित ससुराल वंदनपुर के बीच बीतता था। चर्चा है कि इसी दौरान उसकी गतिविधियां दोबारा तेज हुईं और वह पुलिस की रडार पर आ गया।









