अंबेडकरनगर। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर गुरुवार को भाजपा ने जयंती संस्मरण पखवाड़ा के तहत जिला मुख्यालय स्थित लोहिया सभागार में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया। कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, राजनीतिक योगदान और संगठन की विचारधारा पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य एवं भाजपा के क्षेत्रीय मंत्री विनोद कुमार पटेल रहे। विषय प्रवर्तन पूर्व जिलाध्यक्ष यमुना प्रसाद चतुर्वेदी ने किया। सम्मेलन की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पटेल देव ने की, जबकि संचालन आनंद श्रीवास्तव ने किया।
डॉ. मुखर्जी के जीवन से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक रखे गए विचार
मुख्य अतिथि विनोद कुमार पटेल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का प्रारंभिक जीवन कोलकाता में बीता। उन्होंने इंग्लैंड से बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद कोलकाता हाईकोर्ट में वकालत की। बाद में वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और देशहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया और नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध करते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का सार्वजनिक जीवन और उनके निर्णय आज भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का विषय हैं।
जनसंघ की स्थापना और धारा 370 का किया उल्लेख
भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पटेल देव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव में जनसंघ के तीन सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें डॉ. मुखर्जी भी शामिल थे।
उन्होंने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का उल्लेख करते हुए इसे डॉ. मुखर्जी के विचारों से जोड़कर प्रस्तुत किया। साथ ही कहा कि देश की एकता और अखंडता उनके सार्वजनिक जीवन का प्रमुख उद्देश्य रही।









