तेल अवीव। इजराइल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने हैं। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता का भविष्य तय होगा। हालांकि, सरकार बदलने के बावजूद फिलिस्तीनियों की स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा या नहीं, इस पर सवाल बने हुए हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि नेतन्याहू के कई प्रमुख विरोधी नेता भी फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश बनाने के समर्थन में नहीं हैं।
फिलिस्तीन के मुद्दे पर विपक्ष भी एकमत नहीं
इजराइल की राजनीति में फिलिस्तीन के साथ समझौते और दो-राष्ट्र समाधान का मुद्दा लंबे समय से अहम रहा है। लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध ने राजनीतिक बहस की दिशा बदल दी है। सुरक्षा, हमास के निरस्त्रीकरण और सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा में प्रमुख हो गए हैं।
हालांकि, सभी विपक्षी दलों का रुख एक जैसा नहीं है। प्रमुख विपक्षी नेता गादी आइज़ेनकोट फिलिस्तीनी देश के गठन का विरोध करते हैं, जबकि वामपंथी दल ‘द डेमोक्रेट्स’ दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। अरब नेतृत्व वाले कुछ दल भी फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की वकालत करते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इजराइल की सभी विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर एक ही राय रखती हैं।
इजराइल में वामपंथ और दक्षिणपंथ का क्या मतलब है?
दुनिया के कई देशों में वामपंथी राजनीति सामाजिक समानता, कल्याणकारी योजनाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों पर जोर देती है। वहीं, दक्षिणपंथी राजनीति में राष्ट्रीय पहचान, सुरक्षा और परंपराओं को अधिक महत्व दिया जा सकता है। हालांकि, इन विचारधाराओं की परिभाषा हर देश में अलग हो सकती है।
इजराइल में वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच एक बड़ा अंतर फिलिस्तीनियों के साथ राजनीतिक समझौते, स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य और कब्जे वाले क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों को लेकर रहा है। वामपंथी दलों के एक हिस्से ने बातचीत और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है। दूसरी ओर, दक्षिणपंथी दलों का बड़ा हिस्सा फिलिस्तीनी राज्य के गठन का विरोध करता रहा है और वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के विस्तार का समर्थन करता है।
7 अक्टूबर के हमले के बाद बदला राजनीतिक माहौल
हमास के हमले के बाद इजराइल में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा और अधिक प्रमुख हो गया। चुनाव में नेतन्याहू के विरोधी भी हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा में सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। इससे फिलिस्तीनियों के लिए तत्काल किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की उम्मीद सीमित दिखाई देती है।
फिर भी, दोनों पक्षों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी आइज़ेनकोट अवैध बस्तियों और वहां होने वाली हिंसा के खिलाफ कार्रवाई की बात करते हैं। इसके विपरीत, नेतन्याहू के गठबंधन में शामिल कुछ दक्षिणपंथी नेता वेस्ट बैंक पर इजराइल का नियंत्रण बढ़ाने और उसके कुछ हिस्सों को अपने देश में मिलाने की मांग करते रहे हैं।









