अंबेडकरनगर। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में बी.एन.के.बी.पी.जी. कॉलेज, अकबरपुर में आयोजित ग्रीष्मकालीन कार्यशाला ‘बोधि-पथ’ के तृतीय दिवस बौद्ध दर्शन, अहिंसा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि भगवान बुद्ध के विचार आज भी विश्व समुदाय के सामने खड़ी अनेक चुनौतियों के समाधान का मार्ग दिखाते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विषय विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट (डॉ.) विवेक कुमार तिवारी, विशिष्ट अतिथि डॉ. भानु प्रताप राय, डॉ. बृजेश कुमार रजक तथा कार्यशाला सह-संयोजक अमित द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
‘बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक’
‘बौद्ध धर्म: अहिंसा और विश्व समुदाय’ विषय पर व्याख्यान देते हुए लेफ्टिनेंट (डॉ.) विवेक कुमार तिवारी ने कहा कि बौद्ध धर्म विश्व की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं में प्रमुख स्थान रखता है। इसकी आधारशिला अहिंसा, करुणा और ज्ञान पर टिकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध, हिंसा, पर्यावरणीय संकट और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों से जूझ रही दुनिया के लिए बौद्ध दर्शन एक प्रभावी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का अहिंसा का संदेश केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला वैश्विक सिद्धांत है, जो विश्व शांति और मानव एकता को मजबूत आधार प्रदान करता है।
‘लोकतंत्र की जड़ों में भी दिखाई देते हैं बुद्ध के विचार’
विशिष्ट अतिथि डॉ. भानु प्रताप राय ने बौद्ध धर्म और लोकतंत्र के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुद्ध द्वारा स्थापित संघ व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त उदाहरण है। संघ में सभी भिक्षुओं को समान अधिकार प्राप्त थे और निर्णय सामूहिक चर्चा व आम सहमति से लिए जाते थे।









