दिवाली की खरीदारी से गुलजार लखनऊ के बाजार

मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की मांग- अमीनाबाद से चौक तक बाजारों में बढ़ी रौनक

लखनऊ। लखनऊ के बाजारों में दिवाली की रौनक दिखने लगी है। दुकानों पर मिट्टी के दीये, हाथ से बनी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, रंग-बिरंगी झालर और टेराकोटा के सजावटी सामान सज गए हैं। त्योहार की खरीदारी के बीच इस बार परंपरागत वस्तुओं और स्थानीय कारीगरों के काम को भी खास जगह मिल रही है।

कोई बचपन की यादें ताजा करने के लिए मिट्टी के बर्तन खरीद रहा है, तो कोई अपने बच्चों को पुरानी परंपराओं से जोड़ने के लिए दीये और मिट्टी के खिलौने घर ले जा रहा है। अमीनाबाद, पत्रकारपुरम, यहियागंज, निशातगंज और चौक के बाजारों में ग्राहकों की भीड़ नजर आने लगी है। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है।

100 से 5100 रुपये तक की लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं

दिवाली पर घरों में पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की खरीदारी भी शुरू हो गई है। मनोज गुप्ता पिछले 15 साल से दिवाली के मौके पर मूर्तियों की दुकान लगा रहे हैं। उनके यहां 100 रुपये से लेकर 5100 रुपये तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं।

दुकान पर साधारण देसी मूर्तियों के साथ फैंसी और कोलकाता शैली की प्रतिमाएं भी रखी गई हैं। मनोज के मुताबिक, मूर्तियों की कीमत उनके आकार और सजावट के आधार पर तय होती है। सबसे महंगी 5100 रुपये की प्रतिमा पर कुंदन वर्क की बारीक सजावट की गई है।

राजस्थान से आकर 10 साल से दुकान लगा रहीं ललिता

दिवाली के बाजार में दूसरे राज्यों से आए छोटे कारोबारी भी अपनी दुकानें सजा रहे हैं। राजस्थान की रहने वाली ललिता पिछले 10 साल से दिवाली पर लखनऊ में दुकान लगाती हैं। वह घरों के दरवाजों के दोनों तरफ लटकाए जाने वाले सजावटी सामान बेचती हैं।

इन सजावटी वस्तुओं की कीमत आकार के हिसाब से 100 से 500 रुपये तक है। ललिता ने बताया कि उनका छोटा बच्चा है, इसलिए उन्हें दुकान पर बैठकर ही सामान बेचना पड़ता है। त्योहार के दौरान दुकान लगाना उनके लिए कमाई का अहम मौका होता है।

एक रुपये का दीया, सेट खरीदने पर भी मोलभाव

मिट्टी के दीये और बर्तनों की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ रही है। रेशमा बचपन से मिट्टी के बर्तन बनाने और बेचने का काम कर रही हैं। उनके परिवार में यह कारोबार दादा-बाबा के समय से चला आ रहा है।

उनकी दुकान पर पांच, सात, 10 और 11 दीयों वाले खप्पर के अलावा कई तरह के दीपक उपलब्ध हैं। रेशमा के मुताबिक, सादा दीया सबसे ज्यादा बिकता है। छोटा दीया एक रुपये का है, जबकि पूरा सेट 50 से 60 रुपये में मिलता है।

हालांकि, ग्राहकों के मोलभाव से दुकानदारों को परेशानी भी होती है। रेशमा बताती हैं कि कई ग्राहक 50 से 60 रुपये वाले सेट को 20 से 30 रुपये में देने की मांग करते हैं। उनके अनुसार, पहले इतनी मोलभाव नहीं होती थी, लेकिन अब ग्राहकों को कीमत समझाने में काफी समय लग जाता है।

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