अंबेडकरनगर। पशु के काटने या खरोंचने के बाद की गई लापरवाही रेबीज का खतरा बढ़ा सकती है। विश्व रेबीज दिवस पर सोमवार को जिले में चले जागरूकता अभियान में लोगों को इससे बचाव के जरूरी उपाय बताए गए। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने टांडा और अकबरपुर में जागरूकता कार्यक्रम किया। पशुपालन विभाग ने पांच स्थानों पर पालतू और निराश्रित कुत्तों का निःशुल्क टीकाकरण किया।
ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र टांडा और शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र अकबरपुर में आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते, बिल्ली या किसी अन्य पशु के काटने अथवा खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए। चिकित्सक की सलाह से एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (आरआईजी) लगाया जाता है। वैक्सीन का पूरा कोर्स करना भी जरूरी है।
लोगों को यह भी बताया गया कि घाव पर मिर्च, हल्दी, तेल, चूना, मिट्टी या कोई अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं। आवारा या संदिग्ध व्यवहार वाले पशुओं से दूरी बनाए रखें। पशु के काटने या खरोंचने की घटना को छिपाने के बजाय तत्काल स्वास्थ्यकर्मी को जानकारी दें।
पांच स्थानों पर लगा एंटी-रेबीज टीका
पशुपालन विभाग की ओर से राजकीय सदर पशु चिकित्सालय अकबरपुर, टांडा, जलालपुर, भियांव (रत्ना) और जहांगीरगंज में कुत्तों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया। पालतू और निराश्रित कुत्तों को निःशुल्क एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई। पशु प्रेमियों ने भी अपने पालतू कुत्तों के साथ निराश्रित कुत्तों का टीकाकरण कराया।
मेडिकल कॉलेज में कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव और विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में हुआ। चिकित्सा टीमों, इंटर्न चिकित्सकों और आशा कार्यकर्ताओं ने लोगों को रेबीज से बचाव की जानकारी दी।
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